ओलिगोस्पर्मिया क्या होता है, इसके मुख्य कारण और आयुर्वेद में कैसे किया जाता है इलाज ? 

ओलिगोस्पर्मिया: जानें इसके कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज के तरीके

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आप में से बहुत से लोगों को शायद से यह बात पता नहीं होगी कि लौ स्पर्म काउंट की समस्या को ओलिगोस्पर्मिया के नाम से जाना जाता है | पुरुषों को शुक्राणुओं की संख्या में कमी होने का पता तब तक नहीं चल पाता, जब तक वह अपनी महिला साथी को गर्भधारण करने की कोशिश नहीं करते और असफल नहीं हो जाते | एक टेस्ट के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है की आपके शुक्राणुओं की सामान्य संख्या क्या है और यह होने के कई कारण हो सकते है | आइये जानते है ओलिगोस्पर्मिया को विस्तार पूर्वक से :-      

ओलिगोस्पर्मिया क्या होता है ? 

ओलिगोस्पर्मिया पुरुषों में पायी जाने वाली एक चिकित्सा समस्या है जिसमें पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या काफी कम हो जाती है | एक महिला को गर्भवती करने के लिए, पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं की एक स्वस्थ मात्रा का होना आमतौर पर बेहद आवश्यक होता है | 2009 में प्रकाशित डब्ल्यूएचओ द्वारा यह कहा गया कि यदि एक पुरुष में वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या 15 मिलियन शुक्राणु प्रति लीटर से कम है तो इस स्थिति को ओलिगोस्पर्मिया कहा जाता है | 

आयुर्वेद में शुक्र को अंतिम और सातवीं धातु में वर्णन किया जाता है | भोजन के पचने के बाद उत्पन्न पोषक क्रमशः सभी धातुओं का पोषण करता हुआ अंत में शुक्र में तब्दील हो जाता है | इस प्रक्रिया में हमेशा पित्त दोष की प्रधानता रहती है | यहाँ वर्णित अधिकतर कारण शरीर में मौजूद पित्त को विकृत कर पाचन शक्ति और धतवाग्रि को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर देता है, जिसके परिणाम स्वरूप शुक्राणुओं की मात्रा और गुणवत्ता क्षति हो जाती है |    

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ओलिगोस्पर्मिया और एज़ूस्पर्मिया में क्या अंतर है ? 

ओलिगोस्पर्मिया का मतलब है की आपके वीर्य में शुक्राणुओं का एक मापनीय मात्रा मौजूद है लेकिन यह सामान्य संख्या से बहुत कम होता है | अब अगर एज़ूस्पर्मिया की बात करें तो यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें पुरुष के वीर्य में शुक्राणु बिलकुल ही मौजूद नहीं होते है | पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होने के कारण, वह बांझपंन का शिकार हो जाते है | यदि आप पिछले एक साल से अपनी महिला साथ के साथ गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे और हर बार असफल हो जाते है, तो इसका मतलब यह हुआ की आप बांझपन का शिकार हो गए है | 

ओलिगोस्पर्मिया होना कितना आम है ? 

एक शोध के अनुसार इस बात का भी तक पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं हो पाया है की अभी तक कितने लोग ओलिगोस्पर्मिया का शिकार हो गए है | यह समस्या होने का एक व्यक्ति को तब तक पता नहीं चल पता, जब तक वह अपनी महिला साथी के साथ गर्भधारण करने में असमर्थ नहीं हो जाता | इस बात का तो अनुमान है की पूरे विश्वभर में कम से कम 180 करोड़ लोग बांझपन की समस्या से पीड़ित है | 

जिन लोगों को जन्म के समय में पुरुष माना जाता है, वह लगभग कुल बांझपन समस्या होने के आधे जिम्मेदार होते है | लगभग 50 प्रतिशत के इस आंकड़े में वह स्थितियां शामिल होती है, जहां पुरुष कारक एक मात्र बांझपन होने का प्रमुख कारक होता है और वे अधिक सामान्य जहां दोनों भागीदारों के प्रजनन कारक भी शामिल होते है | आइये जानते है ओलिगोस्पर्मिया होने के प्रमुख लक्षण और कारण क्या है :- 

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ओलिगोस्पर्मिया होने के प्रमुख लक्षण और कारण क्या है ?  

ओलिगोस्पर्मिया होने के मुख्य लक्षण यह है की असुक्षित तरीकों से एक साल तक यौन संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण करने में असमर्थ हो जाना है | अब अगर बात करें कारणों की तो ऐसी कई चीज़ें है,जो आपको ओलिगोस्पर्मिया होने के या फिर लौ स्पर्म काउंट होने के विकारों का अनुभव करवा सकती है | जिनमें शामिल है :- 

  • ऐसी बीमारी जिसमें आनुवंशिक, संक्रमण, हार्मोन और अवरोधों से संबंधित शामिल होती है | 
  • पर्यावरण में विषाक्त पदार्थ के मौजूद होने के कारण 
  • अधिक गर्मी होने की वजह से 
  • ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थ के सेवन करने से आदि | 

आयुर्वेद में ओलिगोस्पर्मिया का कैसे किया जाता है इलाज ?               

आयुर्वेद शास्त्रों में शुक्र धातु को सफ़ेद, भारी, चिपचिपा, मधुर, मात्रा में अधिक, दिखने में घी के समान और शहद के समान गाढ़ा गुण वाला होने को ही गर्भ के उपयुक्त माना जाता है | पित्त को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण गुणों में कफ-मेद और शुक्र के विपरीत होने कारण यह इनमें विकार को उत्पन्न कर देता है | कुछ निम्नलिखत समाधान है, जिसके ज़रिये इस विकार का इलाज किया जा सकता है, जिनमें शामिल है :- 

  • पित्त वर्धक और नैदानिक कारणों को दूर करना
  • शरीर और मन के लिए एक स्वस्थ दिनचर्या का पालन करना 
  • प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम करने का अभ्यास करना, इससे रक्त संचार में काफी सुधार होता है | 
  • पंचकर्म विधि द्वारा शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालना 
  • रसायन और वाजीकरण योगों का निर्देशानुसार पालन करना आदि | 
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आयुर्वेद में ओलिगोस्पर्मिया प्राकृतिक उपचारों के ज़रिये आसानी से इलाज किया जा सकता है | यदि आप में कोई भी पुरष ओलिगोस्पर्मिया की समस्या से पीड़ित है और कई संस्थानों से इलाज करवाने के बावजूद आपकी स्थिति पर किसी भी  प्रकार का सुधार नहीं आ रहा है तो इसके इलाज के लिए आप डॉक्टर एसएस जवाहर से परामर्श कर सकते है | डॉक्टर एसएस जवाहर संजीवनी हेल्थ सेंटर के सीनियर कंसल्टेंट और पंजाब के बेहतरीन सेक्सोलॉजिस्ट और आयुर्वेदिक उपचार स्पेशलिस्ट में से एक है, जो पिछले 33 सालों से अपने मरीज़ों का स्थायी रूप से इलाज कर रहे है | 

इसलिए आज ही संजीवनी हेल्थ सेंटर की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाएं और परामर्श के लिए तुरंत अपनी नियुक्ति को बुक करें | इसके आलावा आप चाहे तो वेबसाइट पर मौजूद नंबरों से संपर्क कर सीधा संस्था से संपर्क कर सकते है |